आज का मानव विचार किये बिना ही अभिप्राय देने की शहंशाही भोग रहा है ।
इंसान की महान शक्ति है विचार । विचार के जैसा ही मनुष्य का व्यक्तित्त्व होता है.इसलिए मनुष्य को वैचारिक शुद्धी की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। शुद्ध विचार यह मनुष्य का आंतरिक सौंदर्या है।
विचारवंत मनुष्य बुद्ध भी बन सकता है .और संहारक युद्ध भी खडा कर सकता है। विचारों के सहारे मनुष्य अपने मनोजगत को दिव्या भी बना सकता है और दानवीर भी। योग्य निर्णय के लिए वैचारिक व्यायाम की इसीलिएजरुरत है। विवेक युक्ता वैचारिक व्यायाम मनुष्या को निर्मल विचार यात्री बनाता है। यानी पुरे भ्रमांड में विचार सेज्यादा शक्तिशाली कोई नहीं है। साहित्य ,संगीत ,कला,अध्यात्म , विज्ञानिक आविष्कार ये सब विचारों से ही हमें मिले है। मगर यह भी सच है की विचार सर्जन भी कर सकता है और संहार भी कर सकता है।
इंसान धन से गरीब होता है .इसी प्रकार विचार की दृष्टी से भी गरीब हो सकता है। विचारों से गरीब व्यक्ति खुद केलिए व् समाज के लिए भी तकलीफ कर सकता है.विचारो से गरीब व्यक्ति ना कभी प्रगति कर सकते है, ना कभीअलग हट कर कुछ नया मार्ग ग्रहण कर सकते है.धन से गरीब ही , विचारो से गरीब हो ऐसा नहीं है.धन से अमीरभी विचारों से गरीब हो सकता है ।
इंसान रातो रात अमीर बन सकता है.मगर रातोरात विचारशील नहीं बन सकता. आज का मनुष्य विचार बिना हीअभिप्राय देते रहता है.यह भी सामजिक जीवन के लिए अभिशाप है।
मगर ........सावधान ! विचारों की अजिर्नता , भोजन की अजिर्नता से भी ज्यादा खतरनाक है।
इंसान की महान शक्ति है विचार । विचार के जैसा ही मनुष्य का व्यक्तित्त्व होता है.इसलिए मनुष्य को वैचारिक शुद्धी की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। शुद्ध विचार यह मनुष्य का आंतरिक सौंदर्या है।
विचारवंत मनुष्य बुद्ध भी बन सकता है .और संहारक युद्ध भी खडा कर सकता है। विचारों के सहारे मनुष्य अपने मनोजगत को दिव्या भी बना सकता है और दानवीर भी। योग्य निर्णय के लिए वैचारिक व्यायाम की इसीलिएजरुरत है। विवेक युक्ता वैचारिक व्यायाम मनुष्या को निर्मल विचार यात्री बनाता है। यानी पुरे भ्रमांड में विचार सेज्यादा शक्तिशाली कोई नहीं है। साहित्य ,संगीत ,कला,अध्यात्म , विज्ञानिक आविष्कार ये सब विचारों से ही हमें मिले है। मगर यह भी सच है की विचार सर्जन भी कर सकता है और संहार भी कर सकता है।
इंसान धन से गरीब होता है .इसी प्रकार विचार की दृष्टी से भी गरीब हो सकता है। विचारों से गरीब व्यक्ति खुद केलिए व् समाज के लिए भी तकलीफ कर सकता है.विचारो से गरीब व्यक्ति ना कभी प्रगति कर सकते है, ना कभीअलग हट कर कुछ नया मार्ग ग्रहण कर सकते है.धन से गरीब ही , विचारो से गरीब हो ऐसा नहीं है.धन से अमीरभी विचारों से गरीब हो सकता है ।
इंसान रातो रात अमीर बन सकता है.मगर रातोरात विचारशील नहीं बन सकता. आज का मनुष्य विचार बिना हीअभिप्राय देते रहता है.यह भी सामजिक जीवन के लिए अभिशाप है।
मगर ........सावधान ! विचारों की अजिर्नता , भोजन की अजिर्नता से भी ज्यादा खतरनाक है।