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My Dear Daughter !( Hindi)
बेटी चली ससुराल !
प्रिय बेटी जीनल , 08 /02/15
अपने इस घर में तुम सुरक्षित ,निश्चिंत और आजादी का जीवन बिता रही थी । आज तुम अपना नया आशियाना बसाने जा रही हो। इस अवसर पर हम तुमसे कुछ ख़ास बाते बताना चाहते है, अपने माता -पिता की ये बाते ध्यान से सुनना और समझना ।
Father to a Son
- विचार बड़े बड़े करना , मगर छोटी छोटी खुशियों को भी मानते रहना।
- व्यक्ति घिस जाए उसकी परवाह नहीं, मगर व्यक्ति मिट ना जाए वह महत्व का है।
- अच्छी अच्छी पुस्तको को सहेज कर रखना ,फिर चाहे ऐसा क्यों न लगे की ये पढ़ी नहीं जायेगी।
- किसी के भी प्रति आशा खोना मत , क्योंकि चमत्कार रोज होते रहते है।
- हर बात में उत्तमता का आग्रह रखना और उसकी कीमत चुकाने को तैयार रहना।
- तंदुरस्ती अपने आप ठीक रहेगी , ऐसा कभी मत समझना।
- अपनी नजर के सामने हमेशा कुछ सुन्दर रखना , फिर भले ही वह एक प्याले में रखा फूल ही हो।
- मुझसे यह काम थोडा सा ही होगा ऐसा लगे ,इसलिए उस काम को नहीं करना ऐसा मत मानना ,जो थोडा भी तुमसे होता है वह जरुर करना।
- सम्पूर्णता के लिए नहीं , श्रेष्ठता के लिए कोशिश करना।
- जो तुच्छ है उसे पहचानना सीखे ,फिर उसकी अवगणना करे।
- घिस जाना मगर मिट मत जाना , अपने आप को निरंतर सुधारते रहने की प्रतिज्ञा करना।
- हार में खेलदिली ,जीत में खेलदिली बताना , प्रशंसा सबके सामने करना ,टीका अकेले में करना।
- तेरे परिवार को तू कितना चाहता है उसे रोज तेरे शब्दों द्वारा ,स्पर्श द्वारा ,तेरी विचार शीलता द्वारा बताते रहना।
- अपने आप में परिवर्तन लाने की अपनी शक्ति का अंदाजा कभी कम मत लगाना. मगर दूसरो में परिवर्तन लाने की अपनी शक्ति का अंदाजा बहुत ज्यादा मत मानना।
- कब चुप रहना उसका ख्याल रखना और और कब चुप नहीं रहना उसका भी ख्याल रखना।
- गन्दगी के सामने हमेशा युद्धरत रहना।
- दुसरो की सफलता में उत्साह बताना और दुसरे लोगो को उनको खुद का महत्व पता चले ऐसे मौके ढूंढ़ते रहना।
- अपने निर्वाह के लिए मेहनत करते हर व्यक्ति के साथ सम्मान से पेश आना ,फिर चाहे भले वह कार्य छोटा ही क्यों ना हो।
- इस प्रकार जीवन जीना की तुम्हारे बालक जब भी इमानदारी ,निष्ठा और प्रामाणिकता का विचार करे तब उन्हें तुम याद आओ।
- जिन्हें उस बात की कभी खबर भी ना लगे ऐसा हो ,ऐसे लोगो के लिए कुछ अच्छा करते रहने की आदत डालना।
- गुलाबो की सुगंध ले सको , इतनी फुरसत रखना।
- दिमाग मजबुत रखना , दिल नरम रखना।
- कौन सही है ,उसे जानने में वक्त कम लगाना और क्या सही है उसे जानने में ज्यादा।
- जो गाँठ छुट सकती है उसे कभी मत काटना।
- बड़े युद्ध जितने के लिए छोटी छोटी लड़ाईयाँ हारना सीखना।
- हर चीज जिस हालत में हमे मिली है , उससे अच्छी हालत में उसे रखना सीखे।
- सफल लग्न जीवन का आधार दो बातो पर निर्भर है. योग्य पात्र ढूंढना और योग्य पात्र बनना।
- समय नहीं मिलता ऐसा मत कहना क्योंकि एक दिन में तुम्हे भी उतने ही घंटे मिलते है जितने मदर टेरेसा , जे आर डी टाटा ,आइन्सताईना ,महात्मा गाँधी आदि को।
- सुख का आधार संपति ,सत्ता या शौर्य पर नहीं , मगर जिन्हें हम चाहते और सम्मान करते है उन लोगो के साथ अपने संबंधो पर है।
- तुम्हे मान मिले उसमे दूसरो को भी सहभागी बनाना।
- अपने बच्चो को नियमित कुछ पढ़ कर सुनाना , गीत सुनाना और हमेशा उन्हें सुनना।
- "मुझे इसकी खबर नहीं" ऐसा कहते डरना मत, "मुझसे भूल हो गई" ऐसा कहते हिचकिचाना मत,"मै शर्मिंदा हूँ " ऐसा कहते डगमगाना मत।
- कभी कभी असफल होने की तैयारी रखना।
Adopt Or Die
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"THOMAS JEFFERSON " कहते थे की अगर आपको लोकशाही को जिन्दा रखना है तो प्रजा को शिक्षित (Educate) करना पड़ेगा, व्यापार में भी सफलता के लिए अपने कर्मचारियों को जानकार बनाओ , उन्हें ज्यादा तालीम दो, कामदारो को संतुष्ट रखो. तुष्ट गाय ज्यादा दुध देती है.
व्यापार जगत में बेस्ट प्रोडक्ट( Best Product) और बेस्ट आईडिया ( Best Idea )ही व्यापारी को जीवित रखता है।
हर कर्मचारी( Employee ) सिर्फ पैसो के लिए ही काम नहीं करता , उन्हें पैसो के अलावा मोटिवेशन ( Motivation )की भी जरुरत होती है. उन्हें लगना चाहिए की कंपनी में उसके आत्म सम्मान( Self Respect) की रक्षा हो रही है, और उसने कंपनी के कई कामो में जो काम किया वह महत्व का था।
सिर्फ व्यक्तित्व महत्व का नहीं है. बल्कि कंपनी का नेटवर्क ,संगठन और व्यवस्था का प्रकार भी महत्व का है।
"BE YOUR SELF" यानी आप अपने आप से वफादार रहो. अपने मूल स्वभाव अनुचार ही काम करो. जो कुछ भी पढो ,सोचो या दूसरो की सलाह सुनो, उसे अपनी व्यवहार बुद्धि से चैक करो. हर बिजनेस गुरु यह बात कहता है की , जिस कंपनी के मुख्य व्यक्ति में मौलिकता (Originality) होगी, वही इस बदलते विश्व में सफल होगा ,टिक पायेगा।
व्यापार में LEADERSHIP महत्व की है. यानि BUSINESS LEADER के व्यक्तित्व के ऊपर कंपनी की सफलता का मुख्य आधार है. करिश्मा वाला (Charismatic) लीडर अपने नीचे के व्यक्तियों को प्रोत्साहीत करने और प्रेरणा करने की शक्ति वाला होना चाहिये. मगर उसके लिए अपने SELF-ESTEEM यानी अपना आत्म गौरव रखने वाला होना चहिये।
Books Ask So Many Things
किताबे
करती है बाते,
बीते जमाने की ,
दुनीया की , इंसानों की,
आज की , कल की,
खुशियों की, गमो की,
फूलो की, बमों की ,
जीत की , हार की ,
प्यार की , मार की,
क्या तुम सुनोगे इन किताबो की बाते ?
किताबे कुछ कहना चाहती है ।
तुम्हारे पास रहना चाहती है।
किताबो मे चिडिया चह- चहाती है।
किताबो मे खेतीया लहलहाती है।
किताबो मे झरने गुण गुनाते है।
परीयो के किस्से सुनाते है।
किताबो मे रोकेट का राज है।
किताबो मे साइन्स की आवाज है।
किताबो का कितना बड़ा संसार है।
किताबो मे ज्ञान की भरमार है।
क्या तुम इस संसार मै नहीं जाना चाहोंगे ?
किताबे कुछ कहना चाहती है।
तुम्हारे पास रहना चाहती है.
करती है बाते,
बीते जमाने की ,
दुनीया की , इंसानों की,
आज की , कल की,
खुशियों की, गमो की,
फूलो की, बमों की ,
जीत की , हार की ,
प्यार की , मार की,
क्या तुम सुनोगे इन किताबो की बाते ?
किताबे कुछ कहना चाहती है ।
तुम्हारे पास रहना चाहती है।
किताबो मे चिडिया चह- चहाती है।
किताबो मे खेतीया लहलहाती है।
किताबो मे झरने गुण गुनाते है।
परीयो के किस्से सुनाते है।
किताबो मे रोकेट का राज है।
किताबो मे साइन्स की आवाज है।
किताबो का कितना बड़ा संसार है।
किताबो मे ज्ञान की भरमार है।
क्या तुम इस संसार मै नहीं जाना चाहोंगे ?
किताबे कुछ कहना चाहती है।
तुम्हारे पास रहना चाहती है.
.Teacher Is A Best Manufacturer ?
Teacher Is A Best Manufacturer ?
वो कहते है की,जो कर सकते है, वो करते है।
जो कुछ नहीं कर सकते , वो शिक्षक बनते है !
वो लोग पुछते है ...
बोलो, शिक्षक क्या बनाता है ?
सच में जानना है की-
मै एक शिक्षक
क्या करता हूँ ? क्या बनाता हूँ ?
मै बालको के पास से,
वह मेहनत लेता हूँ,
की जो उनकी ताकत होने के बावजुद
वे कर सकते है ऐसा भरोसा नहीं होता .
मै सी - ग्रेड को गोल्ड मेडल दिला सकता हूँ ,
और ए -ग्रेड को
गाल पर तमाशा पड़े ऐसे ,
उसकी असली मर्यादा का तम-तमाता
एहसास!
अगर आप बेस्ट ना बनना चाहते हो ,
तो मेरा समय बर्बाद नहीं कर सकते .
मै विधार्थी को घंटो तक
एक जगह बिठाए रख सकता हूँ .
मै विधार्थी के अभिभावकों को फ़ोन करके ,
उन्हें उनके बच्चे कैसे है,
और क्या कर सकते है
उसकी पहचान करवाता हूँ .
आपको अभी भी जानना है की
मै (व्यापारी की अपेक्षा से)क्या बनाता हूँ ?
मै जीने जैसा इंसान बनाता हूँ .
मै विधार्थीओ को अद्धभुतता (आश्चर्य )सिखाता हूँ .
उन्हें सवाल पुछना सिखाता हूँ .
उन्हें भुल हो वहां -
सच्चे दिल से माफ़ी मांगना सिखाता हूँ .
मै उन्हें लिखने ,बोलने
और ज्यादा से ज्यादा पढ़ने की आदत सिखाता हूँ .
मै टकोर करता हुं उनकी भाषा,
और उनकी गणित में .
मै उन्हें समझाता हूँ की ,
अगर तुम्हारे पास प्रतिभा हो,
तो पुरुषार्थ की इतनी चिढीया चढो .
और दुनिया के निर्णय (जजमेंट) का
जिंदगी से जवाब दो .
मै एक शिक्षक हूँ .
अपने प्रयत्नों से दुनिया में परिवर्तन लाता हूँ .
मगर , आप क्या करते है ?
Books Waiting For You
किताबे झांकती है,
बंद अलमारी के शीशों से,
बड़ी हसरत से तकती है,
महीनो अब मुलाक़ात नहीं होती,
जो शामे उनकी मोहब्बत में,
कटा करती थी ,
अब अक्सर गुजर जाती है,
"कम्पयुटर "के पर्दों पर .
बड़ी बैचेन रहती है किताबे ,
इन्हें अब नींद में चलने की ,
आदत हो गयी है ,
बड़ी हसरतो से तकती है, ये कित्ताबे !
----गुलज़ार
Who Is Educated ?
वे ही सर्व सच्चे अर्थो में शिक्षित है!
पहले, वे जो रोजाना आने वाले हालात का सामना सही ढंग से करते है, और वे जो हालात से सामना होने पर सही निर्णय लेने और सही कदम उठाने में शायद ही कभी चुकते हो!
दुसरे वे जो दूसरो के साथ व्यवहार में बडप्पन दिखाते है , दुसरो के अप्रिय व्यवहार और बातो का बुरा नहीं मानते और अपने सहयोगियों के साथ उतने भले होते है ,जितना की एक इंसान हो सकता है!
और आगे , वे जो अपनी खुशियों पर काबू रखते है,और कठिनाइयो को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते ,और कठीन परिस्थितियों का मुकाबला एक बहादुर इंसान की तरह करते है जो इंसानी फितरत है!
और सबसे बड़ी बात यह है की वे लोग जो सफलता मिलने पर बिगड़ते नहीं,जो अपनी असलीयत से मुहँ नहीं मोड़ते, साथ ही बुद्धिमान और धीर - गंभीर व्यक्ति की तरह मजबूती (द्रढता ) से जमीन पर पैर जमाये रखते है, तुक्के से मिली अच्छी चीजों पर खुश होने के बजाये, जन्म से मिली काबलियत, और बुध्धि से प्राप्त कामयाबियो पर खुश होते है . खुश होने की ऐसी प्रवर्ति उनकी बचपन से ही होती है!
जिन लोगो के चरित्र में इनमे से एक - दो नहीं,बल्कि सारे गुण है, जिन्होंने ये सभी बाते सीखी है -वे ही सर्व गुण सम्पन्न सच्चे अर्थो में शिक्षित है!
सुकरात (ईस्वी पूर्व ४७० से ३९९) द्वारा कही गयी लगभग २५०० वर्ष पहले की ये बाते आज भी उतनी ही मायने रखती है या शायद ज्यादा .........!
9 Way to Mature Your Intelligence ( Hindi)
बुद्धि (Intelligence) नौ (9 ) प्रकार से परिपक्व (Mature)बनती है।
1) उम्र के बढ़ने से ।
2) यश के विस्तार से ।
3) बार -बार प्रश्न पूछने से।
4) गुरु के साथ रहने से।
5) गंभीरता पूर्वक विचार करने से।
6) अच्छे लोगो के साथ विचारना करने से ।
7) मन में प्रेम भाव की अभिवृद्धि (बढाने ) करने से।
8) अनुकूल स्थान में निवास करने से।
9) किताबे पढने से।
Religion is a Responsibility
धर्मं एक कर्त्तव्य है।
हम अलग -अलग रूप में अलग -2 प्रकार के धर्मं/कर्त्तव्य को निभाते है। जो कुछ इस प्रकार से है:
एक आत्मा का धर्म/ कर्त्तव्य मोक्ष पाना है।
एक इंसान का धर्मं इंसानियत है।
एक पति का पत्नी के प्रति धर्मं,
एक पत्नी का पति के प्रति धर्मं ,
माता /पिता का बच्चो के प्रति धर्मं
बच्चो का माता -पिता के प्रति धर्मं ,
एक राजा का प्रजा के प्रति धर्मं ,
प्रजा का राजा ,राज्य व देश के प्रति धर्मं ,
अध्यापक का शिष्यों के प्रति धर्मं ,
शिष्यों का अध्यापक के प्रति धर्मं ,
एक इंसान का अपने शरीर के प्रति धर्मं ।
एक इंसान का दुसरे इंसान के प्रति धर्मं ,
अब हम इसे धर्मं , कर्तव्य या जवाबदारी जो चाहे कह ले !
पूत कपूत तो क्यों धन संचे,पूत सपूत तो क्यों धन संचे
जिस स्थितीमें इंसान आ जाता है, उस स्थिती को मानने की तैयारी हो तो दुःख और पीड़ा की ज्यादातर वेदना चली जाती है। सुख और दुःख से निर्लेप बन कर जो अपनी खुशमिजाजी बनाए रखता है ,आखिर में जीत उसी की होतीहै। इंसान की सुख और दुःख में खुश रहने की मस्त मिजाजी उसे ऐसा सुख प्राप्त करवाता है, जिसे कोई ऑर व्यक्ति या परिस्तिथि उससे छीन नहीं सकती ।
अपनी जरुरत से ज्यादा धन इकठ्ठा करने वाले व्यक्ति के दो गणित मुख्य रहते है।
१).संचय किया हुआ धन उसे भविष्य की चिंताओं से मुक्त करेगा , २)जब खुद वह इस दुनिया छोड़ कर चला जाएगा तब वह धन उसके पुत्र पुत्रियो के काम आयेगा -।
भविष्य के लिए इंसान कुछ - न-कुछ इंतजाम करे तो इसके इस व्यावारिक बुध्हि का विरोध नहीं किया जा सकता। मगर इंसान का अनुभव तो ऐसा बताता है की भविष्य तो किसी की कल्पना या योजना अनुसार किसी के सामनेनहीं आता है। जब भविष्य , वर्तमान बन सामने आता है , तब एकदम अलग ही परिस्तिथि सामने आती है। जोविचार कर इंतजाम किया हो वो बने ही नहीं ऑर जो नहीं विचारा हो वहीबन जाता है ।
अब दूसरी बात संतानों की करे - मेरे जाने के बाद संचय किया हुआ धन ,मिल्कत आदि मेरे पुत्रो के काम आएगाऐसे सुंदर वहम में इंसान जीता है। अपने संतानों के लिए कुछ छोड़ जाने की भावना पिताको हो वह अच्छी बात है, मगर वह धन संतान को कब कीस प्रसंग में काम ऐसा कोई नहीं जान सकता । संतान वडीलो का त्र्रुण स्वीकारकरेंगे की नहीं , वह बात भी अनुमान बन जाती है। क्योंकि संतानों का उनका अपना जीवन होता है। उनका अलगभविष्य होता है.ऑर जिन्दगी के बारे में उनके स्वतंत्र विचार होते है । एक युवक ने मजाक में कहाँ, . "मेरे पिता ,पुत्र के लिए बहुत सारा धन छोड़ कर जा रहा हूँ , ऐसे ख्याल के साथ गए ,मगर मेरे पिता मेरे लिए जो धन छोड़ कर गए उससे अनेक गुना धन तो मैंने खुद कमाया है.ऑर जो कुछ भी कमाया उसमे मेरे पिताजी के धन का बिल्कुल उपयोग नहीं किया । उन्हें अच्छा लगे या ना लगे ,मगर उनका दिया हुआ एक वारसा मुझे याद रखने जैसा लगता है वह है -डायबीटीस का रोग । " माँ- बाप को लगता है की अपने बालको की जिन्दगी की सब व्यवस्था अपने हाथ सेकर के जाए ,मगर ऐसा सोचा हुआ अक्सर होता नहीं है । उन्हें नहीं मालुम की उनकी संतान उनकी व्यवस्था कोबदल डालेगा । बड़े महल छोड़ कर जाने वाले राजाओं ने कल्पना की होगी की उनके वंशज सुख से रहेंगे ।परिस्तिथि बदल जाने से उनमे कइयो ने महल को होटलों में बदल दिया है ।
माँ - बाप अपने पुत्रो को बहुत कुछ दे सकते है , व देते भी है। शरीर उनका ही दिया हुआ है.प्रेम की एक बड़ी वसीयतदे सकते है। जिन्दगी में आने वाली समस्याओं को सुलझाने की सूझ -बुझ ऑर सुख दुःख की परिस्तिथि का सामनाकरने की हिम्मत भी वे अपने वसीयत में दे सकते है। रुपये की वसीयत से भी ज्यादा महत्वपूर्ण ऑर कीमती होऐसा बन सकता है ।
पूत सपूत तो क्यों धन संचे ?
पूत कपूत तो क्यों धन संचे ?
अपनी जरुरत से ज्यादा धन इकठ्ठा करने वाले व्यक्ति के दो गणित मुख्य रहते है।
१).संचय किया हुआ धन उसे भविष्य की चिंताओं से मुक्त करेगा , २)जब खुद वह इस दुनिया छोड़ कर चला जाएगा तब वह धन उसके पुत्र पुत्रियो के काम आयेगा -।
भविष्य के लिए इंसान कुछ - न-कुछ इंतजाम करे तो इसके इस व्यावारिक बुध्हि का विरोध नहीं किया जा सकता। मगर इंसान का अनुभव तो ऐसा बताता है की भविष्य तो किसी की कल्पना या योजना अनुसार किसी के सामनेनहीं आता है। जब भविष्य , वर्तमान बन सामने आता है , तब एकदम अलग ही परिस्तिथि सामने आती है। जोविचार कर इंतजाम किया हो वो बने ही नहीं ऑर जो नहीं विचारा हो वहीबन जाता है ।
अब दूसरी बात संतानों की करे - मेरे जाने के बाद संचय किया हुआ धन ,मिल्कत आदि मेरे पुत्रो के काम आएगाऐसे सुंदर वहम में इंसान जीता है। अपने संतानों के लिए कुछ छोड़ जाने की भावना पिताको हो वह अच्छी बात है, मगर वह धन संतान को कब कीस प्रसंग में काम ऐसा कोई नहीं जान सकता । संतान वडीलो का त्र्रुण स्वीकारकरेंगे की नहीं , वह बात भी अनुमान बन जाती है। क्योंकि संतानों का उनका अपना जीवन होता है। उनका अलगभविष्य होता है.ऑर जिन्दगी के बारे में उनके स्वतंत्र विचार होते है । एक युवक ने मजाक में कहाँ, . "मेरे पिता ,पुत्र के लिए बहुत सारा धन छोड़ कर जा रहा हूँ , ऐसे ख्याल के साथ गए ,मगर मेरे पिता मेरे लिए जो धन छोड़ कर गए उससे अनेक गुना धन तो मैंने खुद कमाया है.ऑर जो कुछ भी कमाया उसमे मेरे पिताजी के धन का बिल्कुल उपयोग नहीं किया । उन्हें अच्छा लगे या ना लगे ,मगर उनका दिया हुआ एक वारसा मुझे याद रखने जैसा लगता है वह है -डायबीटीस का रोग । " माँ- बाप को लगता है की अपने बालको की जिन्दगी की सब व्यवस्था अपने हाथ सेकर के जाए ,मगर ऐसा सोचा हुआ अक्सर होता नहीं है । उन्हें नहीं मालुम की उनकी संतान उनकी व्यवस्था कोबदल डालेगा । बड़े महल छोड़ कर जाने वाले राजाओं ने कल्पना की होगी की उनके वंशज सुख से रहेंगे ।परिस्तिथि बदल जाने से उनमे कइयो ने महल को होटलों में बदल दिया है ।
माँ - बाप अपने पुत्रो को बहुत कुछ दे सकते है , व देते भी है। शरीर उनका ही दिया हुआ है.प्रेम की एक बड़ी वसीयतदे सकते है। जिन्दगी में आने वाली समस्याओं को सुलझाने की सूझ -बुझ ऑर सुख दुःख की परिस्तिथि का सामनाकरने की हिम्मत भी वे अपने वसीयत में दे सकते है। रुपये की वसीयत से भी ज्यादा महत्वपूर्ण ऑर कीमती होऐसा बन सकता है ।
पूत सपूत तो क्यों धन संचे ?
पूत कपूत तो क्यों धन संचे ?
University's marksheet goof-up upsets student
MUMBAI: Heard of the tiny kirana shop giving out handwritten kuchcha bills? Now, the University
of Mumbai has started that practice and is giving out handwritten marksheets.
Every student gets a computerised marksheet, but if you spot an error and give it back to the university for rectification, you are bound to get a handwritten one back. For Karan Jagani, a BMS student of Nagindas Khandwala College, the fight to get a printed marksheet has been going for almost a year now.
“In the original computerised marksheet, my class was wrongly printed as ‘pass class’, though I had scored a distinction. When I approached the university and asked them to correct it, they gave me a fresh handwritten marksheet. No foreign university is accepting it,’’ said Karan, who passed in 2009.
What’s even more shocking is that the university has not even stamped the handwritten marksheet. Even as Karan was trying to get his hands on a computerised marksheet, the convocation certificate that he received again goofed up his class. “I got a pass class again in the convocation certificate, which shows that the university never updated its records despite giving me a new marksheet,’’ added Karan.
He is not the only one. Jasmine Ramaya, was earlier declared ‘fail’ in a subject and when he submitted a revaluation application, he was found to have passed the subject. “But when I received my marksheet, the university made a mistake and filled my old lower scores. When I informed them about the same, I was given a handwritten marksheet with the new revalued scores.’’
University officials said that each time an amendment is made in the marksheet, the marks and certificates department immediately gives them a handwritten marksheet. In the meantime, a candidate is expected to fill a form, requesting for a computerised one and later surrender the handwritten marksheet, explained controller of examinations, Vilas Shinde. While students had filled a form for a computerised marksheet, they had not surrendered the handwritten one, he added.
of Mumbai has started that practice and is giving out handwritten marksheets.
Every student gets a computerised marksheet, but if you spot an error and give it back to the university for rectification, you are bound to get a handwritten one back. For Karan Jagani, a BMS student of Nagindas Khandwala College, the fight to get a printed marksheet has been going for almost a year now.
“In the original computerised marksheet, my class was wrongly printed as ‘pass class’, though I had scored a distinction. When I approached the university and asked them to correct it, they gave me a fresh handwritten marksheet. No foreign university is accepting it,’’ said Karan, who passed in 2009.
What’s even more shocking is that the university has not even stamped the handwritten marksheet. Even as Karan was trying to get his hands on a computerised marksheet, the convocation certificate that he received again goofed up his class. “I got a pass class again in the convocation certificate, which shows that the university never updated its records despite giving me a new marksheet,’’ added Karan.
He is not the only one. Jasmine Ramaya, was earlier declared ‘fail’ in a subject and when he submitted a revaluation application, he was found to have passed the subject. “But when I received my marksheet, the university made a mistake and filled my old lower scores. When I informed them about the same, I was given a handwritten marksheet with the new revalued scores.’’
University officials said that each time an amendment is made in the marksheet, the marks and certificates department immediately gives them a handwritten marksheet. In the meantime, a candidate is expected to fill a form, requesting for a computerised one and later surrender the handwritten marksheet, explained controller of examinations, Vilas Shinde. While students had filled a form for a computerised marksheet, they had not surrendered the handwritten one, he added.
Provisional mark sheets leave students in a lurch
They are unable to get jobs and admission abroad as these are not recognised by varsities and companies
Dipti Sonawala
Posted On Monday, June 07, 2010 at 02:03:08 AM
Scores of students from Mumbai University (MU), who have erroneous mark sheets are an angry lot. Whenever, there is an error in the mark sheet, MU provides its students with a provisional handwritten mark sheet. But more often than not, the provisional mark sheet is not accepted by foreign universities and companies.
They told me that a computerised mark sheet would be issued in few days. But till date, they have not issued a rectified computerised mark sheet to me. In fact, even the convocation certificate that I received in April 2010 states a Pass Class. I was planning to apply for higher studies in foreign universities but they do not accept a handwritten mark sheet.” Citing a similar problem, Nachiketa Pandya, a TY BMS student said that after failing in one subject by 10 marks, he had applied for revaluation in 2009. “I was declared pass after revaluation and given a handwritten mark sheet. However, I cannot apply for jobs or admission abroad because they accept only computerised mark sheets.”
Commenting on the delay in issuing computerised mark sheets, Prof Shinde said, “Since the staff is not computer literate, we have to forward the work of making computerised mark sheets to the Central Computing Facility (CCF) section. In order to forward the work the to CCF section, students first have to surrender their provisional hand-written mark sheet.Students usually fail to submit their provisional mark sheet on time and later hold MU responsible for the delay,” Prof Shinde said. However, begging to differ, an engineering student said, “I had surrendered the hand-written mark sheet in November 2009. However, I have still not received the computerised mark sheet.” |
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