धर्मं एक कर्त्तव्य है।
हम अलग -अलग रूप में अलग -2 प्रकार के धर्मं/कर्त्तव्य को निभाते है। जो कुछ इस प्रकार से है:
एक आत्मा का धर्म/ कर्त्तव्य मोक्ष पाना है।
एक इंसान का धर्मं इंसानियत है।
एक पति का पत्नी के प्रति धर्मं,
एक पत्नी का पति के प्रति धर्मं ,
माता /पिता का बच्चो के प्रति धर्मं
बच्चो का माता -पिता के प्रति धर्मं ,
एक राजा का प्रजा के प्रति धर्मं ,
प्रजा का राजा ,राज्य व देश के प्रति धर्मं ,
अध्यापक का शिष्यों के प्रति धर्मं ,
शिष्यों का अध्यापक के प्रति धर्मं ,
एक इंसान का अपने शरीर के प्रति धर्मं ।
एक इंसान का दुसरे इंसान के प्रति धर्मं ,
अब हम इसे धर्मं , कर्तव्य या जवाबदारी जो चाहे कह ले !