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Religion is a Responsibility




धर्मं एक कर्त्तव्य है। 
हम अलग -अलग रूप में अलग -2 प्रकार के धर्मं/कर्त्तव्य को निभाते है।                     जो कुछ इस प्रकार से है:
एक आत्मा का धर्म/ कर्त्तव्य  मोक्ष पाना  है।
एक इंसान का धर्मं इंसानियत है।
एक पति का
पत्नी के प्रति धर्मं,
एक पत्नी का पति के प्रति धर्मं ,
माता /पिता
का बच्चो के प्रति धर्मं
बच्चो का माता -पिता के प्रति धर्मं ,
एक राजा
का प्रजा के प्रति धर्मं ,
प्रजा का राजा
,राज्य व देश के प्रति धर्मं ,
अध्यापक का शिष्यों के प्रति धर्मं ,
शिष्यों का अध्यापक के प्रति धर्मं ,
एक इंसान का अपने शरीर के प्रति धर्मं ।
एक इंसान का दुसरे इंसान के प्रति धर्मं ,
अब हम इसे धर्मं , कर्तव्य या जवाबदारी जो चाहे कह ले !

Shree Saraswati Vandana

हे शारदे माँ ! हे शारदे माँ !, अज्ञानता से हमें तार दे माँ
तू स्वर की देवी ,संगीत तुजसे ,हर शब्द तेरा ,हर गीत तुजसे
हम है अकेले ,हम है अधूरे ,तेरी चरण हम,हमे तार दे माँ
हे शारदे माँ ()
मुनियों ने समझी ,गुणियो ने जानी, आगम की भाषा,जिनवर की वाणी
हम भी तो समझे , हम भी तो जाने, विद्या का हमको अधिकार दे माँ
हे शारदे माँ ()
तू स्वेत वर्णी ,कमल पर बिराजे ,हाथो में वीणा ,मुकुट सर पे साझे
मन से हमारे ,मीटा दे अँधेरा ,हमको उजाले का संसार दे माँ
हे शारदे माँ ()

पालीताणा


यह पीले कलर की पालीताणा की मोतीशा टोंक है उसके आगे सफ़ेद कलर की मुख्य टोंक है। जहा आदीनाथ यहगवान बीराज्मान है।