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Giving Respect is not all the way Right

Giving Respect is not all the way Right

नमन नमन में फेर हैं !



अनुतीर्ण हुआ लड़का नम्र हो तो उसमे खाश आश्चर्य नहीं, प्रशंस्नीय तो है , प्रथम नंबर से पास हुए लडके की नम्रता मे. व्यक्ति सब जगह ,हर किसी के सामने झुकता जाए इतना लाचार नहीं होना चाहिये. वही किसी के भी सामने ना नमे, इतना उन्मंत या घमंडी भी नहीं होना चाहिये।

नमन नमन में फेर है , बहुत नमे नादान। 
दगलबाज दौहरा नमे , चित्ता  चोर कमान। 

कही भी ना नमने वाला जैसे गर्विष्ठ बन जाता है ,वैसे ही हर जगह नमते रहने वाला गौरवहीन बन जाता है. गर्व  रखना नहीं चाहिए और गौरव गुमाना नहीं चाहिये. तेजस्विता और उन्मत्तता , वैसे ही नम्रत्ता और लाचारी के बीच की भेद रेखा को परख सके , उतना विवेक तो इंसान को रहना ही चाहिए। 


How to Stop Dispute on Disagreement




  असहमती (Disagreement) को ज्यादा विवाद (Dispute)  में बढ़ने से रोकने के ७ उपाय 
  कभी ऐसा होता है की आपकी आक्रमकता देख कर सामने वाले की बोलती बंद हो जाए . मगर यह आपकी जीत नहीं हार है.
अपनी  असहमती को व्यर्थ चर्चा की तरफ मोड़ने से रोकना ,यह भी समयोचित जानकारी (काबिलीयत) का विषय है.
यहाँ पर असहमती को विवाद में बदलने से कैसे रोका जाए ,उसके कुछ सुचन दिए गए है.-
(१) असहमती का स्वागत करो        
(२) अपनी पहली प्रतिक्तिया पर भरोशा ना रखे   
(३) गुस्से पर नियंत्रण रखे                           
(४) विरोध करने वालो की बातो को संपूर्ण रूप से चुने  
(५) प्रत्युतर देने में प्रामाणिकता रखे          
(६) ऐसे वादे करे की विरोधियो के सुचन पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाएगा                    (७)दोनों बातो का विचार करके ही कार्य करे 

(१) असहमती का स्वागत करो -: चर्चा के दरम्यान किसी नए मुद्दे की तरफ आपका ध्यान दिलाया जाए, जिसके बारे में आपने कभी विचार ही नहीं किया हो तो उसका आभार सहीत स्वीकार करना चाहिए .शायद ऐसा भी हो सकता है की ऐसे सुचन से आप गंभीर भूल करने से अटक जाए और भूल को पहले ही सुधार ले.
(२) अपनी पहली प्रतिक्तिया पर भरोशा ना रखे -: जब भी हमारे सामने मुश्किल परिस्थति उपस्थ्ति होती है तब हम उसके बारे में स्वस्थता से सोचने के बदले सुरक्शात्मक्ता को ज्यादा महत्व देते है. ऐसे संजोगो में भावुक होने के बदले ठंडे दिमाग से विचार कर मन में चलते विचारों की आंधी पर नियंत्रण रखना ज्यादा श्रेस्कर होगा. हमारी  प्रथम प्रतिक्रिया श्रेष्ट होने के बदले नुकसान कारक भी हो सकती है.
(३) गुस्से पर नियंत्रण रखे -: मनुष्य का कद उसकी क्रोध नियंत्रण की समता द्वारा मापा जा सकता है. मनुष्य कोनसी  व् कैसी बातो पर गुस्सा होता है उसके द्वारा ही उसका मूल्यांकन होता है.
(४) विरोध करने वालो की बातो को संपूर्ण रूप से सुने -: हमारे विरोधियो को बोलने का पर्याप्त मौका देना यह हमारे ही हित में है. उन्हें अपनी बात पूरी तरह से कहने दी जाए, बीच में विरोध ना करे या  अपने बचाव में बीच में ना कूद पड़े . ऐसा करने एक दीवार खड़ी होती है . विरोधियो की बाते सुन कर हमे ऐसे बिंदु से प्रत्युतर का आरम्भ करना चाहिए ,जिसमे हम अपने  विरोधी के साथ सहमत हो.
 (५) प्रत्युतर देने में प्रामाणिकता रखे -: प्रत्युतर देने में ऐसे बिंदु का भी ध्यान रखना चाहिए ,जिसमे हम अपनी भूल मानते हो तो उसका स्वीकार करे . ऐसे करने से विरोधी ठंडे पड़ जायेंगे .
 (६) ऐसे वादे करे की विरोधियो के सुचन पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाएगा -: चर्चा दरम्यान ऐसा भी हो सकता है की हमारे विरोधी सही हो , अगर जो हम उनके सुचनो पर गंभीरता से सोचना बंद कर देंगे तो विरोधियो की सही बात पर अमल करने का मौका भी गवा देंगे . और विरोधी ज्यादा आक्रामक बन कर , पीछे से ऐसा कहने का मौका जाने नहीं देंगे की हमने तो आपको समझाने की काफी कोशिश की थी ,मगर आपने हमारी बात बिल्कुल अनचुनी कर दी थी. प्रश्न में रस लेने के बदले विरोधियो का आभार मानने से आधी जीत तो अपने आप ही सिद्ध हो जाती है.
(७)दोनों बातो का विचार करके ही कार्य करे -: सब बातो का सकारत्मक - नकारत्मक तरफ का विचार करने के बाद ही सामने वाले पक्ष को फिर से मिलने के लीये बैठक का आयोजन किया जा सकता है.
       सफल संवाद का कौशल्य यह भी एक बड़ी सिद्धी है !



Why Fear About Death, Before Death So Many Things in Life.

मौत खड़ी है हर दर  पे, हर इंसान को मरना है !
मौत से फिर घबराना कैसा ,फिर इससे क्या डरना है !

जीवन का वर्क उलट देखो ,पीछे मौत लिखा होगा !
कौन ये जाने किसको पता ,बाद मौत के क्या होगा ! 
जब आएगी मर भी लेंगे ,बिन आये क्यों मरना है !
मौत से फिर घबराना कैसा ,फिर इससे क्या डरना है !

जीते जी क्यों डरे मौत से ,लाजिम जब ये मरना है !
मर जाओ ये बेहतर है, गर इससे डरना है !
बुझदिल का न जीना कुछ ,और न उसका मरना है !
मौत से फिर घबराना कैसा ,फिर इससे क्या डरना है !

डर लगता मौत का जिसको ,बड़ा काम कुछ करने में !
उसके लिए कहता हूँ मैं, क्या फर्क है जीने मरने में !
नींद खुले का नाम है जीवन, आँख लगे का मरना है!
मौत से फिर घबराना कैसा ,फिर इससे क्या डरना है! 

इस जीवन से पहले भी तुम, मर के कही से आये हो !
मरने से फिर इस जीवन , इतना क्यों घबराए हो !
हर जीवन के पहलू है दो , एक जीना ओर एक मरना है !
मौत से फिर घबराना कैसा ,फिर इससे क्या डरना है !

I Hate Money.

अगर आप चाहते है की ऊपर कहे गए दृढ वचन आपके लिए सही हो तो ,  आप नीचे कही गयी बातो पर हमेशा  विश्वाश  करे:
  •  पैसे पेड पर नहीं उंगते ! 
  • पैसा अपवित्र और गंदा होता है
  • पैसा अमंगलकारी है.
  • मैं गरीब हूँ , मगर ईमानदार हूँ .
  • अमीर आदमी झूठे होते है.
  • मैं पैसा वाला बनकर अकडू नहीं बनना चाहता .
  • मैं कभी भी अच्छी नौकरी नहीं पा सकता .
  • मैं कभी भी पैसा नहीं बना पाउँगा .
  • पैसा जीतना जल्दी आता है उससे भी जल्दी चला जाता है.
  • मैं हमेशा ही पैसे की कमी झेलता हूँ. 
  • गरीब आदमी कभी भी गरीबी से बाहर नहीं नीकल सकता .
  • मेरे माता- पिता गरीब थे और मैं भी गरीब ही रहूंगा. 
  • कलाकार को हमेशा संघर्ष करना पड़ता है.
  • जो दुसरो को धोका दे सकते है वही पैसेवाले बन सकते है.
  • मेरे अलावा बाकी सब आगे नीकल जायेंगे .
  • ओह ! मैं इतनी ज्यादा कीमत नहीं ले सकता . 
  • मैं इसके लायक नहीं हूँ. 
  • मैं इतना काबिल नहीं हूँ की पैसा बना सकू .
  • पैसा कभी उधार मत दो.
  • एक पैसा बचाया मतलब एक पैसा कमाया है. 
  • ख़राब दिनों के लिए पैसा बचा कर रखो. 
  • मुस्किल समय कभी भी आ सकता है. 
  • पैसा सिर्फ कड़ी मेहनत से ही मिल सकता है.
  • दुसरो के पास पैसा देखकर मुझे ग़ुस्सा आता है.
क्या आप सच में सोचते है की इस प्रकार सोचने से आप को समृधि मिल जायगी ?

"I DESERVE THE BEST, AND I ACCEPT THE BEST, NOW "

If  you want the above affirmation to be true for you ,then you do not want to believe any of the following statements:

  • Money doesn't grow on tree.
  • Money is filthy and dirty.
  • Money is evil.
  • I am poor.but clean (good).
  • Rich people are crooks.
  • I don't want to have money and be stuck up.
  • I will never get a good job.
  • I will never make any money.
  • Money goes out faster than it comes in.
  • I am always in debt.
  • Poor people can never get out from under.
  • My parents were poor, and i will be poor.
  • Artist have to struggle.
  • Only people who cheat have money.
  • Everyone else come first.
  • Oh, i couldn't charge that much.
  • I don't deserve.
  • I'm not good enough to make money.
  • Never tell anyone what i have in the bank.
  • Never lend money.
  • A penny saved is a penny earned.
  • Save for a rainy day.
  • A depression could come at any moment.
  • I resent other having money.
  • Money only comes from hard work.

हमारे पास अधिक बुद्धि और अल्प सम्पति है..

हमारी मान्यता है की हमारे पास -अधिक बुद्धि है।
और
हमारी मान्यता है की हमारे पास -अल्प सम्पति है।

अधिक बुद्धि की मान्यता ने हमें - नम्र बनते रोका ।
अधिक बुद्धि की मान्यता ने हमें - समर्पण करते रोका।
अधिक बुद्धि की मान्यता ने हमें - विनयी बनते रोका।
अधिक बुद्धि की मान्यता ने हमें - सरल बनते रोका।

अल्प सम्पति की मान्यता ने हमें- संतोषी बनते रोका ।
अल्प सम्पति की मान्यता ने हमें- नीतिमान बनते रोका।
अल्प सम्पति की मान्यता ने हमें- सन्वेदनशील बनते रोका।
अल्प सम्पति की मान्यता ने हमें- उदार दील बनते रोका।

मान -सम्मान की रक्षा . .



अगर आप खुद के मान सम्मान  को महत्व देते है तो  गुणवान और अच्छे चरित्र वाले लोगो की संगत में रहो क्योंकि गलत और हल्के चरित्र वाले लोगो के साथ रहने से तो अच्छा है आप अकेले ही रहो।
अच्छे चरित्र वाला व्यक्ति अगर आप का दुश्मन होगा तो भी वह आप के मान सम्मान का ख्याल रखेगा । मगर गलत व हल्के चरित्र वाला आप का जिगरी यार होगा  आप का भ्रम तो भी कभी भी आप के मान सम्मान को ठेस पहुंचा सकता है

Why All are Distraught to Vulnerable ?

                                                                                                 क्या इस जगत में कठोरता की ही जीत है ?


पेड़ पर लगे नुकीले कांटो को कोई चूता नहीं और कोमल फूलो को सब तोड़ते है. रास्ते में पड़े कांटो पर कोई पैर नहीं देता और कोमल फूलो को सब मचल कर चलते है। भोकने वाले कुत्ते से सब दूर भागते है और मरियल कुत्ते को सभी परेशान करते है धन और शरीर वगेरे से कमजोर व्यक्ति को सभी दबाने की कोशीश करते है,मगर शरीर और धन वगेरे की हेसियत रखने वालो से सब दबते है। क्या कमजोर को हमेशा हारना ही है। क्रोधी व्यक्ति से सब डरते है और सरल व्यक्ति का उपहास करते है।
हां! यह विचार व्यवहारिक जगत में भले ही सत्य प्रतिक होता होगा ,


मगर आध्यात्मिक जगत में तो इसके विपरीत स्थिति ही है आध्यात्मक जगत में तो क्रोधी आत्माओं का पतन ही हुआ है। श्रमाशील ही विकास के मार्गमें हमेशा आगे रहे है। नम्र व्यक्ति ही ऊपर उठे है। जबकी अभिमानी व्यक्ति का तो पतन ही हुआ है। आध्यात्मिकजगत में सहन करने वाले जीते ही है और परेशान करने वाले हारे ही है। फूलो को चाहत मिली है और कांटो को तिरस्कार मिला है।
                     

" दुनिया दबाती है,

                 दबने वाला चाहिए "