Why All are Distraught to Vulnerable ?

                                                                                                 क्या इस जगत में कठोरता की ही जीत है ?


पेड़ पर लगे नुकीले कांटो को कोई चूता नहीं और कोमल फूलो को सब तोड़ते है. रास्ते में पड़े कांटो पर कोई पैर नहीं देता और कोमल फूलो को सब मचल कर चलते है। भोकने वाले कुत्ते से सब दूर भागते है और मरियल कुत्ते को सभी परेशान करते है धन और शरीर वगेरे से कमजोर व्यक्ति को सभी दबाने की कोशीश करते है,मगर शरीर और धन वगेरे की हेसियत रखने वालो से सब दबते है। क्या कमजोर को हमेशा हारना ही है। क्रोधी व्यक्ति से सब डरते है और सरल व्यक्ति का उपहास करते है।
हां! यह विचार व्यवहारिक जगत में भले ही सत्य प्रतिक होता होगा ,


मगर आध्यात्मिक जगत में तो इसके विपरीत स्थिति ही है आध्यात्मक जगत में तो क्रोधी आत्माओं का पतन ही हुआ है। श्रमाशील ही विकास के मार्गमें हमेशा आगे रहे है। नम्र व्यक्ति ही ऊपर उठे है। जबकी अभिमानी व्यक्ति का तो पतन ही हुआ है। आध्यात्मिकजगत में सहन करने वाले जीते ही है और परेशान करने वाले हारे ही है। फूलो को चाहत मिली है और कांटो को तिरस्कार मिला है।
                     

" दुनिया दबाती है,

                 दबने वाला चाहिए "