क्या इस जगत में कठोरता की ही जीत है ?
पेड़ पर लगे नुकीले कांटो को कोई चूता नहीं और कोमल फूलो को सब तोड़ते है. रास्ते में पड़े कांटो पर कोई पैर नहीं देता और कोमल फूलो को सब मचल कर चलते है। भोकने वाले कुत्ते से सब दूर भागते है और मरियल कुत्ते को सभी परेशान करते है । धन और शरीर वगेरे से कमजोर व्यक्ति को सभी दबाने की कोशीश करते है,मगर शरीर और धन वगेरे की हेसियत रखने वालो से सब दबते है। क्या कमजोर को हमेशा हारना ही है। क्रोधी व्यक्ति से सब डरते है और सरल व्यक्ति का उपहास करते है।
हां! यह विचार व्यवहारिक जगत में भले ही सत्य प्रतिक होता होगा ,