असहमती (Disagreement) को ज्यादा विवाद (Dispute) में बढ़ने से रोकने के ७ उपाय
कभी ऐसा होता है की आपकी आक्रमकता देख कर सामने वाले की बोलती बंद हो जाए . मगर यह आपकी जीत नहीं हार है.
अपनी असहमती को व्यर्थ चर्चा की तरफ मोड़ने से रोकना ,यह भी समयोचित जानकारी (काबिलीयत) का विषय है.
यहाँ पर असहमती को विवाद में बदलने से कैसे रोका जाए ,उसके कुछ सुचन दिए गए है.-
(१) असहमती का स्वागत करो
(२) अपनी पहली प्रतिक्तिया पर भरोशा ना रखे
(३) गुस्से पर नियंत्रण रखे
(४) विरोध करने वालो की बातो को संपूर्ण रूप से चुने
(५) प्रत्युतर देने में प्रामाणिकता रखे
(६) ऐसे वादे करे की विरोधियो के सुचन पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाएगा (७)दोनों बातो का विचार करके ही कार्य करे
(१) असहमती का स्वागत करो -: चर्चा के दरम्यान किसी नए मुद्दे की तरफ आपका ध्यान दिलाया जाए, जिसके बारे में आपने कभी विचार ही नहीं किया हो तो उसका आभार सहीत स्वीकार करना चाहिए .शायद ऐसा भी हो सकता है की ऐसे सुचन से आप गंभीर भूल करने से अटक जाए और भूल को पहले ही सुधार ले.
(२) अपनी पहली प्रतिक्तिया पर भरोशा ना रखे -: जब भी हमारे सामने मुश्किल परिस्थति उपस्थ्ति होती है तब हम उसके बारे में स्वस्थता से सोचने के बदले सुरक्शात्मक्ता को ज्यादा महत्व देते है. ऐसे संजोगो में भावुक होने के बदले ठंडे दिमाग से विचार कर मन में चलते विचारों की आंधी पर नियंत्रण रखना ज्यादा श्रेस्कर होगा. हमारी प्रथम प्रतिक्रिया श्रेष्ट होने के बदले नुकसान कारक भी हो सकती है.
(३) गुस्से पर नियंत्रण रखे -: मनुष्य का कद उसकी क्रोध नियंत्रण की समता द्वारा मापा जा सकता है. मनुष्य कोनसी व् कैसी बातो पर गुस्सा होता है उसके द्वारा ही उसका मूल्यांकन होता है.
(४) विरोध करने वालो की बातो को संपूर्ण रूप से सुने -: हमारे विरोधियो को बोलने का पर्याप्त मौका देना यह हमारे ही हित में है. उन्हें अपनी बात पूरी तरह से कहने दी जाए, बीच में विरोध ना करे या अपने बचाव में बीच में ना कूद पड़े . ऐसा करने एक दीवार खड़ी होती है . विरोधियो की बाते सुन कर हमे ऐसे बिंदु से प्रत्युतर का आरम्भ करना चाहिए ,जिसमे हम अपने विरोधी के साथ सहमत हो.
(५) प्रत्युतर देने में प्रामाणिकता रखे -: प्रत्युतर देने में ऐसे बिंदु का भी ध्यान रखना चाहिए ,जिसमे हम अपनी भूल मानते हो तो उसका स्वीकार करे . ऐसे करने से विरोधी ठंडे पड़ जायेंगे .
(६) ऐसे वादे करे की विरोधियो के सुचन पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाएगा -: चर्चा दरम्यान ऐसा भी हो सकता है की हमारे विरोधी सही हो , अगर जो हम उनके सुचनो पर गंभीरता से सोचना बंद कर देंगे तो विरोधियो की सही बात पर अमल करने का मौका भी गवा देंगे . और विरोधी ज्यादा आक्रामक बन कर , पीछे से ऐसा कहने का मौका जाने नहीं देंगे की हमने तो आपको समझाने की काफी कोशिश की थी ,मगर आपने हमारी बात बिल्कुल अनचुनी कर दी थी. प्रश्न में रस लेने के बदले विरोधियो का आभार मानने से आधी जीत तो अपने आप ही सिद्ध हो जाती है.
(७)दोनों बातो का विचार करके ही कार्य करे -: सब बातो का सकारत्मक - नकारत्मक तरफ का विचार करने के बाद ही सामने वाले पक्ष को फिर से मिलने के लीये बैठक का आयोजन किया जा सकता है.
सफल संवाद का कौशल्य यह भी एक बड़ी सिद्धी है !
