वे ही सर्व सच्चे अर्थो में शिक्षित है!
पहले, वे जो रोजाना आने वाले हालात का सामना सही ढंग से करते है, और वे जो हालात से सामना होने पर सही निर्णय लेने और सही कदम उठाने में शायद ही कभी चुकते हो!
दुसरे वे जो दूसरो के साथ व्यवहार में बडप्पन दिखाते है , दुसरो के अप्रिय व्यवहार और बातो का बुरा नहीं मानते और अपने सहयोगियों के साथ उतने भले होते है ,जितना की एक इंसान हो सकता है!
और आगे , वे जो अपनी खुशियों पर काबू रखते है,और कठिनाइयो को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते ,और कठीन परिस्थितियों का मुकाबला एक बहादुर इंसान की तरह करते है जो इंसानी फितरत है!
और सबसे बड़ी बात यह है की वे लोग जो सफलता मिलने पर बिगड़ते नहीं,जो अपनी असलीयत से मुहँ नहीं मोड़ते, साथ ही बुद्धिमान और धीर - गंभीर व्यक्ति की तरह मजबूती (द्रढता ) से जमीन पर पैर जमाये रखते है, तुक्के से मिली अच्छी चीजों पर खुश होने के बजाये, जन्म से मिली काबलियत, और बुध्धि से प्राप्त कामयाबियो पर खुश होते है . खुश होने की ऐसी प्रवर्ति उनकी बचपन से ही होती है!
जिन लोगो के चरित्र में इनमे से एक - दो नहीं,बल्कि सारे गुण है, जिन्होंने ये सभी बाते सीखी है -वे ही सर्व गुण सम्पन्न सच्चे अर्थो में शिक्षित है!
सुकरात (ईस्वी पूर्व ४७० से ३९९) द्वारा कही गयी लगभग २५०० वर्ष पहले की ये बाते आज भी उतनी ही मायने रखती है या शायद ज्यादा .........!