*सबरीमला की तरह जैन धर्म मे महिलाओं के मंदिरो मे प्रवेश पर संपूर्ण प्रतिबंध क्यो नही ?*
अभी अभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया की सबरीमला के मंदिर मे महिलाओ को प्रवेश मिलेगा, इसके पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने शनिश्वर मंदिर मे महिलाओं के पुजा करने पर और हाजीअली मस्जिद मे प्रवेश के प्रतिबंध को खारिज किया था।
आखिर क्यो इन पवित्र स्थलो पर महिलाओं के लिए रोक थी? क्या ये महिलाओं के साथ अन्याय था या कुछ और?
सबरीमाला मंदिर मे 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध था। क्योंकि ये उम्र महिलाओं के लिए मासिक धर्म का समय होता है। विधाता ने महिलाओं की शारीरिक रचना इस प्रकार की हैं कि महीने के कुछ दिन अशुद्धि के रहते हैं।
सदियों से लगभग हर धर्म मे यह परंपरा रही है की अशुद्धता पुर्वक पवित्र स्थलों मे प्रवेश वर्जित/ निषेध माना गया हैं और मासिक धर्म के समय को तो सबसे ज्यादा अशुद्ध माना जाता हैं।
मगर कई जगह महिलाओं मे जब इसका स्वेच्छा से पालन बंद होने लगा तो सबरीमाला जैसे बड़े तीर्थो मे महिलाओं के प्रवेश पर ही पूर्ण रूप से प्रतिबंध लग गया।
अब एक उदाहरण जैन धर्म का देखते हैं। कहते हैं जैन धर्म मे सूक्ष्मता से आचरण के पालन पर जोर दिया जाता हैं। मगर किसी भी जैन तीर्थ या मंदिर मे महिलाओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध नही है क्योंकि जैन धर्म मे महिलाएँ स्वेच्छा से इन अशुद्धि के दिनों का और उसके आगे पीछे के दिनों का पालन करती हैं। कम से कम पवित्र स्थलों के लिए तो पूर्ण ख्याल रखा जाता है।
जब समानता के नाम पर हर नियमो की धज्जियां उड़ाई जाती हैं, तब ऐसे घर्षण पैदा होते हैं। जब कुदरत ने ही पुरूष और महिला के शारीरिक रचना मे फर्क रखा हैं तो किस बात का विरोध? जहाँ कहीं कही महिलाओं को पीछे रखा हैं तो सम्मान मे कई जगह महिलाओं को पुरुषों से आगे रखा हैं।
जहाँ तक कानूनी जीत की बात हैं, कानून उसी प्रकार से फैसला दे सकता हैं जो धाराएँ संविधान मे लिखी हैं। फिर चाहे वो मनमर्जी के अनैतिक रिश्ते रखने की बात हो या कुछ और। हर व्यक्ति को समानता का अधिकार, हर कोई अपनी मर्जी से जी सकता हैं। न्याय देने वाले इन धाराओं मे बंधे होते हैं।
धाराएँ /संविधान अच्छे के लिए ही बनाई जाती हैं मगर कभी कभी उसका गलत उपयोग भी हो सकता है।
मगर इंसान को कभी कभी अपने विवेक के आधार पर निर्णय लेकर खुद पर स्वेच्छा से बंदिश लगानी चाहिए।
जिन्हे मासिक धर्म के समय काल मे कुछ भी अशुद्धता नही लगती उन्हे इस विज्ञान को गहराई से जानने की विनंती हैं।
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