दिवाली और नव वर्ष

                               दिवाली और नव वर्ष
  एक आखरी दिन और दूसरा पहला दिन !
  अंत और आरम्भ जुड़े हुए है ,
  विनाश और सर्जन जुड़े हुए है ,
  दुःख और सुख जुड़े हुए है ,
  धुप और छाया जुड़े हुए है,
  आखरी दिन भी आनंद ,
  प्रथम दिन भी आनंद ,
  आनंद ही जीवन का आदर्श बिंदु है.

  आनंद का अर्थ है सहज प्रसन्नता , सोचा हुआ हो या बिना सोचा,         मन पसन्द  बने या ना पसंद , सफलता मिले या असफलता , जीवन के ऐसे तमाम मोड पर सहज प्रसन्नता बनी रहे , वही है सच में आनंद !

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